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मिशन दिल्ली: जल्द वादे पूरा करना चाहती है सपा

MP POST:-28-03-2012
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की जीत से उत्साहित सपा की नजर अब दिल्ली फतह पर है, जिसके लिए वह उन सब वादों को पूरा करना चाहती है जो उसने राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए थे। जिसके लिए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पूरी शिद्दत के साथ जुट गए हैं और वादों को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार को निर्देश भी दे दिए हैं।
बेटे अखिलेश यादव को उत्तार प्रदेश की गद्दी सौंपकर मुलायम अब केंद्र की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले लोगों से किए गए वादों को पूरा कर सपा अध्यक्ष आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी को एक बड़ी ताकत बनाना चाहते हैं। बीते दिनों समाजवादी चिंतक राम मनोहर लोहिया की जयंती पर लखनऊ में उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश से जल्द से जल्द घोषणा पत्र में किए गए वादे पूरे करने के निर्देश दिए थे। मुलायम ने कहा कि घोषणा पत्र के सारे वादे जल्द पूरा करें। घोषणा पत्र की प्रतियां अधिकारियों को दे दें और उनसे अपने विभाग में इसे छह माह में लागू करने के लिए कहे। घोषणा-पत्र के सभी वादे पूरे करने में एक साल से ज्यादा का समय नहीं लगना चाहिए।
जानकारों के मुताबिक प्रदेश सरकार यदि किसानों के लिए पेंशन व बीमा, किसानों तथा बुनकरों को नि:शुल्क बिजली और उनकी कर्जमाफी, सभी को नि:शुल्क दवा एवं शिक्षा, कन्या विद्या धन, छात्रों को लैपटॉप व टैबलेट तथा बेरोजगारी भत्तो जैसे वादों को एक साल के भीतर पूरा कर देती है तो देश में मध्याविध चुनाव की स्थिति में सपा इन्हें जनता के बीच गिनवा सकेगी। आम चुनाव यदि नियत समय पर होते है तो भी पार्टी को जनता के बीच इन्हे ठीक से प्रचारित करने का समय मिल जाएगा।
घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने के अलावा मुलायम सिंह लगातार मंत्रियों को अनुशासन में रहने और सादगी बरतने के साथ-साथ ईमानदारी से काम करने की नसीहत दे रहे हैं, ताकि अखिलेश के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार पर कोई दाग न लगे और सरकार के सुशासन के बल पर आगामी चुनाव में उसे जनता का भरपूर समर्थन मिले।
राजनीतिक विश्लेषक एवं लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रमेश दीक्षति ने कहा कि मुलायम को पता है कि चुनावी वादे पूरे करने से सपा की जनता के बीच अच्छी छवि बनेगी और लोकसभा चुनाव में पार्टी को इसका फायदा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि जनता के बीच अच्छी छवि बनाने के लिए ही मुलायम अब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार में शामिल होने से पीछे हट रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि घोटालों के आरोपों से घिरी संप्रग सरकार में शामिल होने से सपा की छवि भी धूमिल हो सकती है और लोकसभा चुनाव में पार्टी को इसका नुकसान हो सकता है।